उत्तराखंड

दीपावली पर एमडीडीए की ओटीएस की तैयारी, बिना नक्शे वाले भवनों को मिल सकती है राहत

दीपावली से पहले मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) की एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस) लाने की तैयारी है। योजना लागू होने पर बिना नक्शा स्वीकृत कराए भवन बनाने और स्वीकृत नक्शे से अतिरिक्त निर्माण करने वाले भवन स्वामियों को राहत मिल सकती है। हालांकि, योजना की पात्रता, शुल्क में छूट और आवेदन की समयसीमा को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

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प्राधिकरण स्तर पर अक्टूबर में योजना लाने की तैयारी की जा रही है। इसके तहत नियमानुसार कंपाउंडिंग योग्य निर्माणों से जुड़े मामलों का निस्तारण किया जा सकेगा। लंबे समय से लंबित मामलों को सुलझाने के साथ ही भवन स्वामियों को निर्माण संबंधी अनियमितताओं को नियमित कराने का अवसर मिल सकता है। योजना लागू होने से प्राधिकरण को राजस्व प्राप्त होने की भी उम्मीद है।

पहले भी लागू हो चुकी है ओटीएस

एमडीडीए इससे पहले भी भवनों से संबंधित अनियमितताओं के निस्तारण के लिए एकमुश्त समाधान योजना लागू कर चुका है। वर्ष 2019 में कुछ श्रेणियों के निर्माण, विशेषकर आवासीय क्षेत्रों में संचालित निजी क्लीनिकों से जुड़े मामलों में समाधान का अवसर दिया गया था। इसके बाद मार्च 2021 में अनधिकृत निर्माणों की कंपाउंडिंग के लिए व्यापक योजना को मंजूरी दी गई थी, जिसे 30 सितंबर 2021 तक लागू किया गया। जून 2022 में भी योजना की अवधि 30 सितंबर तक बढ़ाई गई थी। मार्च 2024 में होली के अवसर पर भी अप्रैल से सितंबर तक ओटीएस संचालित की गई थी।

नियमों के दायरे में ही मिलेगा लाभ

ओटीएस के तहत उन्हीं भवनों को लाभ मिल सकेगा, जिनका निर्माण प्राधिकरण के निर्धारित नियमों और मानकों के अनुसार कंपाउंडिंग योग्य होगा। बिना स्वीकृत नक्शे वाले भवनों को निर्धारित शर्तों के अधीन नक्शा स्वीकृत कराने का अवसर मिल सकता है। वहीं, स्वीकृत नक्शे से अतिरिक्त निर्माण करने वाले भवन स्वामी भी नियमानुसार कंपाउंडिंग करा सकेंगे।

योजना में शुल्क संबंधी छूट का प्रावधान किया जाता है या नहीं, यह आधिकारिक आदेश जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। इसी तरह आवेदन की प्रक्रिया और पात्रता की शर्तों का भी भवन स्वामियों को इंतजार है।

एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि लंबे समय से लंबित मामलों के निस्तारण के लिए ओटीएस लाई जा रही है। इसमें केवल उन्हीं भवनों की कंपाउंडिंग होगी, जो नियमानुसार योग्य होंगे। प्राधिकरण के नियमों से इतर या शहर के हित को दरकिनार कर कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा।

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