उत्तराखंड

BRICS: चमका उत्तराखंड का आपदा प्रबंधन मॉडल, अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंची सिल्क्यारा रेस्क्यू की गूंज

प्राकृतिक आपदाओं और वर्षा जनित संकटों की दृष्टि से बेहद संवेदनशील उत्तराखंड ने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में एक बार फिर राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान दर्ज कराई है। भारत की अध्यक्षता में ओडिशा के पुरी में तीन से पांच जून तक आयोजित वर्कशॉप में उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन मॉडल की खूब सराहना की गई।

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बैठक का उद्देश्य आपदा जोखिम न्यूनीकरण, मजबूत अवसंरचना, सामुदायिक आधारित पूर्व चेतावनी प्रणाली, पूर्वानुमान आधारित त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र और आपदा प्रबंधन के लिए सतत वित्तीय व्यवस्थाओं पर अनुभवों का आदान-प्रदान करना था।

सम्मेलन में विभिन्न देशों ने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में अपने नवाचार और सफल मॉडल साझा किए। इसी क्रम में उत्तराखंड की ओर से सेनानायक एसडीआरएफ अर्पण यदुवंशी (आईपीएस) और यूएलएमएमसी के निदेशक शांतनु सरकार ने राज्य का प्रतिनिधित्व किया। दोनों अधिकारियों ने उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के नेतृत्व में विकसित आपदा जोखिम न्यूनीकरण, पूर्व तैयारी, क्षमता विकास, तकनीकी नवाचार और प्रभावी प्रतिक्रिया तंत्र पर विस्तृत प्रस्तुति दी।

इस दौरान उत्तराखंड की भौगोलिक जटिलताओं, हिमालयी परिस्थितियों, भूस्खलन, अतिवृष्टि, ग्लेशियर झीलों, सड़क अवरोध और तीर्थयात्रा से जुड़े जोखिमों को विस्तार से रखा गया। साथ ही राज्य में विकसित बहु-एजेंसी समन्वय प्रणाली, पूर्व चेतावनी तंत्र और त्वरित राहत-बचाव व्यवस्था को भी प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया।

 

विशेष रूप से सिल्क्यारा टनल रेस्क्यू ऑपरेशन और धराली आपदा प्रबंधन कार्यों को उत्तराखंड के सफल आपदा प्रबंधन मॉडल के रूप में सामने रखा गया। सम्मेलन में मौजूद प्रतिनिधियों ने इन अभियानों को कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में धैर्य, तकनीक, प्रशासनिक समन्वय और मानवीय संवेदनशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

 

बैठक में उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की पूर्व चेतावनी प्रणाली, जोखिम न्यूनीकरण उपायों और विभिन्न विभागों के बीच तालमेल की विशेष सराहना की गई। वहीं, उत्तराखंड एसडीआरएफ की त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया क्षमता को चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में उत्कृष्ट आपदा प्रतिक्रिया मॉडल के रूप में रेखांकित किया

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